विश्व आदिवासी दिवस पर गोलमेज सम्मेलन एवं विशेषांक का विमोचन

विश्व आदिवासी दिवस पर गोलमेज सम्मेलन एवं विशेषांक का विमोचन
वैश्वीकरण के दौर में आदिवासी कला-संस्कृति पर हुआ गहन मंथन
दिल्ली, 9 अगस्त 2026। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सोसाइटी फॉर एम्पावरमेंट द्वारा “वैश्वीकरण के दौर में आदिवासी कला, विरासत एवं संस्कृति” विषय पर ऑनलाइन माध्यम से एक गरिमामय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्व आदिवासी दिवस विशेषांक का विमोचन भी किया गया। मुख्य वक्ता: पद्मश्री अजय मंडावी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री अजय मंडावी, कांकेर (छत्तीसगढ़) रहे। उन्होंने कहा कि _“आदिवासी संस्कृति प्रकृति, परंपरा और सामुदायिक जीवन के गहरे संबंधों की जीवंत अभिव्यक्ति है। वैश्वीकरण के इस दौर में इस अनमोल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।”_ उन्होंने आदिवासी समाज की समृद्ध कला, लोकपरंपराओं और जीवन-पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशेष वक्ता: डॉ. रूपेन्द्र कविकार्यक्रम के विशेष वक्ता डॉ. रूपेन्द्र कवि, मानवशास्त्री एवं उप सचिव, लोकभवन, छत्तीसगढ़ ने कहा कि _“आदिवासी कला और संस्कृति को केवल अतीत की धरोहर के रूप में नहीं, बल्कि वर्तमान सामाजिक जीवन और भविष्य की सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखने की आवश्यकता है।”_ उन्होंने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया।अध्यक्षता: प्रो. सचिन नारायणकार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सचिन नारायण, मानवशास्त्री ने की। उन्होंने आदिवासी समुदायों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, परंपरागत ज्ञान और कला-विरासत के संरक्षण तथा उसे नई पीढ़ी तक हस्तांतरित करने की आवश्यकता पर बल दिया।महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्शसम्मेलन में आदिवासी कला, सांस्कृतिक विरासत, परंपरागत ज्ञान, प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व तथा वैश्वीकरण के प्रभाव जैसे विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करते हुए उन्हें व्यापक समाज और नई पीढ़ी तक सम्मानपूर्वक पहुंचाना समय की मांग है। विशेषांक का विमोचनइस अवसर पर विश्व आदिवासी दिवस विशेषांक का विमोचन किया गया, जो आदिवासी कला, संस्कृति, विरासत और समकालीन सरोकारों को केंद्र में रखता है। ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों को एक साझा मंच दिया, जहां आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समझने और उसके संरक्षण पर सार्थक संवाद हुआ।यह कार्यक्रम आदिवासी कला, विरासत एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में संपन्न हुआ।
