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दो कृतियों का भव्य लोकार्पण, राज्य स्तरीय “शब्द शिखर सम्मान” से हुए अलंकृत

साहित्य-साधना का स्वर्णिम अध्याय : रायपुर में हुआ साहित्यकार उमेश कुमार श्रीवास की दो कृतियों का भव्य लोकार्पण, राज्य स्तरीय “शब्द शिखर सम्मान” से हुए अलंकृत

रायपुर । प्रदेश की अग्रणी सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था वक्ता मंच द्वारा राजधानी रायपुर स्थित वृन्दावन सभागृह में आयोजित भव्य “काव्य महाकुंभ एवं शब्द शिखर सम्मान समारोह” साहित्य, संस्कृति एवं सृजनशीलता के अनुपम उत्सव के रूप में संपन्न हुआ। इस गरिमामय अवसर पर बिलासपुर जिले के खैरा-जयरामनगर निवासी साहित्यकार, कवि एवं लेखक उमेश कुमार श्रीवास की दो महत्वपूर्ण कृतियाँ “पाँच आगर एक कोरी” (छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह) तथा “काव्य प्रत्यूषा” (दोहा संग्रह) का विधिवत एवं भव्य लोकार्पण किया गया। साथ ही उनकी उत्कृष्ट साहित्य-साधना, सृजनधर्मिता एवं सांस्कृतिक अवदान के लिए उन्हें राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित “शब्द शिखर सम्मान” से अलंकृत किया गया।

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित 151 साहित्यकारों, कवियों एवं रचनाकारों को सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात चिकित्सक एवं साहित्यकार डॉ. गीतेश अमरोहित थे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संयुक्ता गांधी ने की। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. रूपेन्द्र कवि, सुशील सन्नी अग्रवाल, राजकुमार धर द्विवेदी, पं. पी.के. तिवारी, सीमा पाण्डेय, डॉ. अजीत मिश्रा, अखिल भारतीय अघरिया समाज, जिला बिलासपुर के अध्यक्ष कुशल प्रसाद पटेल तथा साहित्यकार उमेश कुमार श्रीवास के अग्रज नरेश कुमार श्रीवास सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

विमोचन अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों एवं विद्वानों ने उमेश कुमार श्रीवास के साहित्यिक अवदान की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में लोकजीवन की सहजता, ग्रामीण संस्कृति की आत्मा, सामाजिक सरोकारों की संवेदना एवं मानवीय मूल्यों का सशक्त प्रतिबिम्ब दृष्टिगोचर होता है। उनकी लेखनी लोकमंगल, जनजागरण एवं सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में सार्थक भूमिका निभा रही है।

उल्लेखनीय है कि “पाँच आगर एक कोरी” में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परम्पराओं, लोकभाषा एवं जनजीवन की सुगंध को गीतों के माध्यम से अभिव्यक्ति प्रदान की गई है, वहीं “काव्य प्रत्यूषा” में दोहा-विधा के माध्यम से जीवन-दर्शन, नैतिक मूल्यों, सामाजिक यथार्थ एवं समसामयिक चिंतन का प्रभावी निरूपण किया गया है। दोनों कृतियाँ साहित्यप्रेमियों एवं पाठकों के मध्य विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के इस विचार को उद्धृत करते हुए कहा कि “साहित्य राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है।” उन्होंने कहा कि साहित्यकार युगचेतना का संवाहक होता है, जो समाज की पीड़ाओं, संघर्षों, आशाओं एवं संभावनाओं को शब्दों में रूपायित कर जनमानस को नई दिशा प्रदान करता है।

समारोह का प्रभावी संचालन वक्ता मंच के संयोजक शुभम साहू द्वारा तथा काव्य गोष्ठी सत्र का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार राजाराम रसिक द्वारा किया गया। संस्था की संरक्षिका ज्योति शुक्ला के आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

उमेश कुमार श्रीवास की इन दोनों कृतियों के लोकार्पण एवं राज्य स्तरीय “शब्द शिखर सम्मान” से सम्मानित होने की सूचना मिलते ही खैरा-जयरामनगर, बिलासपुर सहित समूचे क्षेत्र में हर्ष एवं गौरव का वातावरण व्याप्त हो गया। उनके मित्रों, साहित्यप्रेमियों, शुभचिन्तकों, परिजनों, इष्ट-मित्रों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा उन्हें निरन्तर बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की जा रही हैं। सभी ने उनकी इस उपलब्धि को क्षेत्र की साहित्यिक चेतना के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की मंगलकामनाएँ व्यक्त की हैं।

यह सम्मान एवं पुस्तक-विमोचन न केवल उमेश कुमार श्रीवास की साहित्यिक साधना का प्रतिफल है, बल्कि सम्पूर्ण बिलासपुर अंचल एवं छत्तीसगढ़ के साहित्यिक परिदृश्य के लिए भी गौरव, प्रेरणा और आत्मगौरव का विषय बन गया है।

Ramgopal Bhargav

मेरा नाम रामगोपाल भार्गव है, मैं (नवा बिहान न्यूज़) पोर्टल का संपादक हूँ। Navabihannews.com एक हिन्दी न्यूज़ पॉर्टल है इस पोर्टल छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश दुनियाँ की खबरों को प्रकाशित किया जाता है।

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