साहित्य-साधना के शिखर पर एक और सम्मान श्रीवास ‘अक्षरार्चना हिन्दी सम्मान 2026’ से विभूषित

साहित्य-साधना के शिखर पर एक और सम्मान श्रीवास ‘अक्षरार्चना हिन्दी सम्मान 2026’ से विभूषित
खैरा जयरामनगर के साहित्यकार की साहित्यिक यात्रा को मिला राष्ट्रीय मंच पर सम्मान, साहित्यप्रेमियों ने दी बधाई

बिलासपुर/मस्तूरी। हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति दीर्घकालीन समर्पण, सृजनशीलता एवं निरंतर साहित्य-सेवा के लिए सुप्रतिष्ठित कवि, लेखक एवं साहित्यकार उमेश कुमार श्रीवास, निवासी खैरा जयरामनगर, तहसील-मस्तूरी, जिला-बिलासपुर को ‘अक्षरार्चना हिन्दी सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया है।यह सम्मान उन्हें कविता-कानन साहित्य कला मंच की ओर से हिन्दी भाषा की गरिमा के संरक्षण, साहित्य-सृजन में उल्लेखनीय योगदान तथा साहित्यिक चेतना के प्रसार के लिए प्रदान किया गया। मंच ने कहा कि उनका समर्पण केवल लेखन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक चेतना और लोकजीवन की अनुभूतियों का सशक्त समावेश दिखाई देता है।श्रीवास हिन्दी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी साहित्य में भी निरंतर सक्रिय हैं। गद्य, पद्य, कविता, कहानी एवं काव्य-सृजन के विविध आयामों में उनकी सक्रियता रही है। उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियों में ‘सती सागर महिमा’, ‘सती चालीसा’, ‘काव्य प्रत्यूषा’ तथा छत्तीसगढ़ी गीत-संग्रह ‘पाँच आगर एक कोरी’ शामिल हैं। उनकी रचनाओं में भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक अनुभूति और सामाजिक सरोकारों का सुंदर समन्वय परिलक्षित होता है।साहित्य-सृजन के साथ वे विभिन्न साहित्यिक आयोजनों, कवि-सम्मेलनों एवं रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाते रहे हैं। ‘अक्षरार्चना हिन्दी सम्मान 2026’ उनके साहित्यिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।कविता-कानन साहित्य कला मंच ने उन्हें इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की मंगलकामना की है। साहित्यप्रेमियों एवं शुभचिंतकों ने भी उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।