Blog

प्रमोशन के चक्कर में की गई जल्दबाजी

मस्तूरी में ‘बुलडोजर कार्रवाई’ पर बवाल: आदेश की अवहेलना या तहसीलदार की मनमानी?

बिलासपुर। मस्तूरी तहसील में पट्टे से प्राप्त भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर की गई बुलडोजर कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जहां एक ओर न्यायालय द्वारा कब्जा हटाने के लिए निर्धारित समय सीमा दी गई थी, वहीं दूसरी ओर समय सीमा से पहले ही बुलडोजर चलवा दिया गया।
मामला खसरा नंबर 187/2, रकबा 0.809 हेक्टेयर में से 0.40 एकड़ भूमि का है, जिस पर कब्जाधारी अश्वनी टोण्ट्रे के खिलाफ छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत तहसील न्यायालय द्वारा 10 अप्रैल 2026 को बेदखली का आदेश पारित किया गया था। आदेश के अनुसार कब्जाधारी को 24 अप्रैल 2026 तक स्वयं अवैध कब्जा हटाकर पंचनामा प्रस्तुत करने का समय दिया गया था।
समय से पहले पहुंचा बुलडोजर, उठा विवाद
आरोप है कि तय समय सीमा से पहले ही तहसीलदार के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला और बुलडोजर मौके पर पहुंच गया और दो कमरों के मकान पर कार्रवाई शुरू कर दी गई। पीड़ित अश्वनी टोण्ट्रे ने मौके पर विरोध करते हुए गुहार लगाई, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई और मकान का हिस्सा तोड़ दिया गया।
हाईकोर्ट से स्टे, फिर भी जारी रही कार्रवाई
पीड़ित ने तत्काल उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी, जहां से उसे स्टे आदेश प्राप्त हुआ। आरोप है कि स्टे मिलने के बाद भी कुछ समय तक बुलडोजर चलता रहा और बाद में उच्च अधिकारियों के फोन आने पर कार्रवाई रोकी गई।
पीड़ित का आरोप: प्रमोशन के चक्कर में की गई जल्दबाजी
अश्वनी टोण्ट्रे ने आरोप लगाया कि तहसीलदार शिल्पा भगत द्वारा प्रमोशन की होड़ में जल्दबाजी दिखाते हुए कार्रवाई की गई, जबकि आदेश में स्पष्ट रूप से 24 अप्रैल तक का समय दिया गया था। उन्होंने नुकसान की भरपाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि उसी खसरे में अन्य कब्जाधारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
वहीं इस मामले में तहसीलदार शिल्पा भगत ने सफाई देते हुए कहा कि कब्जाधारी को कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उसने मकान खाली नहीं किया। संबंधित भूमि शासन द्वारा आरटीओ के लिए धर्मकांटा निर्माण हेतु आवंटित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 24 अप्रैल का आदेश कब्जाधारी के लिए नहीं, बल्कि जमादार को पंचनामा प्रस्तुत करने के लिए था। फिलहाल उच्च न्यायालय के आदेश के बाद कार्रवाई रोक दी गई है।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मस्तूरी तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या प्रशासन ने आदेश की सही व्याख्या की या फिर जल्दबाजी में कार्रवाई कर दी? क्या नियमों का पालन हुआ या शक्ति प्रदर्शन किया गया?
अब देखना होगा कि इस मामले में उच्च न्यायालय और जिला प्रशासन आगे क्या रुख अपनाते हैं, और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

Ramgopal Bhargav

मेरा नाम रामगोपाल भार्गव है, मैं (नवा बिहान न्यूज़) पोर्टल का संपादक हूँ। Navabihannews.com एक हिन्दी न्यूज़ पॉर्टल है इस पोर्टल छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश दुनियाँ की खबरों को प्रकाशित किया जाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button