
राजस्थान में ‘डॉ भीमरावअंबेडकर कीर्ति सम्मान’ से अलंकृत होंगे साहित्यकार
बिलासपुर । साहित्य-साधना के पथ पर सतत अग्रसर, संवेदनशील रचनाकार एवं प्रख्यात कवि-लेखक उमेश कुमार श्रीवास को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक अवदान के लिए राजस्थान के जोधपुर में आयोजित गरिमामय समारोह में देश के प्रतिष्ठित ‘डॉ. अंबेडकर कीर्ति सम्मान’ से विभूषित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती (14 अप्रैल) के पावन अवसर पर प्रदान किया जाएगा।
इस अलंकरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार की राज्य मंत्री डॉ. मंजू मेघवाल, विशिष्ट अतिथि पद्मश्री हिमताराम भांभू तथा अखिल भारतीय कबीर मठ सदगुरु कबीर आश्रम सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत डॉ. नानक दास जी महाराज अपने करकमलों से सम्मान अर्पित करेंगे।
उल्लेखनीय है कि 13 एवं 14 अप्रैल को अखिल भारतीय कबीर मठ सदगुरु कबीर आश्रम सेवा संस्थान, बड़ी खाटू तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा अनावरण सेवा समिति, रोहिणी के संयुक्त तत्वावधान में यह द्विदिवसीय भव्य आयोजन संपन्न होगा। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा एवं राष्ट्र-निर्माण के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 100 से अधिक विभूतियों को ‘डॉ. अंबेडकर कीर्ति सम्मान’ से अलंकृत किया जाएगा।
संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत डॉ. नानक दास जी महाराज के अनुसार, यह सम्मान प्रतिवर्ष उन प्रतिभाओं को समर्पित किया जाता है, जिन्होंने सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक उन्नयन एवं शैक्षणिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर समाज को नई दिशा प्रदान की है।
नागौर में आयोजित इस गरिमामय समारोह में स्थानीय विधायक हरेंद्र मिर्धा, जिला कलेक्टर चंपालाल, आईपीएस एवं पूर्व डीजीपी रवि प्रकाश मेहरड़ा सहित अनेक विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता रोहिणी के सरपंच महेश शर्मा करेंगे। समारोह का शुभारंभ बाबा साहब डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के अनावरण के साथ होगा, तत्पश्चात चयनित प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही 135 विशिष्ट व्यक्तित्वों को भारतीय संविधान की प्रतियां भेंट कर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया जाएगा।
महंत डॉ. नानक दास जी महाराज ने सभी चयनित प्रतिभाओं को अग्रिम शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि राष्ट्र के समग्र विकास एवं ‘विकसित भारत’ के निर्माण में उनका योगदान प्रेरणास्पद एवं अनुकरणीय है।
यह सम्मान न केवल साहित्यकार उमेश कुमार श्रीवास की रचनात्मक साधना का गौरवपूर्ण स्वीकार है, बल्कि समर्पण, संवेदना और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी उज्ज्वल प्रमाण है।