

बिलासपुर। संत गुरु घासीदास कला, विज्ञान एवं शिक्षा महाविद्यालय पचपेड़ी में दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी आयोजित किया जा रहा है । जिसमें प्रथम दिवस के मुख्य अतिथि प्रो एन डी आर चंद्रा पूर्व प्रोफेसर नागालैण्ड व कुलपति बस्तर विश्वविद्यालय जगदलपुर, डॉ एस आर कमलेश, डॉ किरण ठाकुर, प्रोफेसर भूपेन्द्र पटेल, डॉ प्रेम चंद जायसी, जितेन्द्र कुमार पाटले, प्राचार्य डॉ रविन्द्र कुमार सहित सभी अतिथियों द्वारा संत गुरु घासीदास जी के तैल्य चित्र पर पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्वलित कार्यक्रम आरंभ किया गया। तत्पश्चात महाविद्यालय परिवार द्वारा सभी अतिथियों का गुलदस्ता व बैच लगाकर एवं संत गुरु घासीदास मोमेंटो साल श्रीफल देकर स्वागत किया गया। तिथियों द्वारा नई शिक्षा नीति एन इपी 2020 का सामाजिक आर्थिक प्रभाव का पूस्तक का विमोचन किया गया। उसके बाद अतिथियों ने अपने अपने विचार व्यक्त किये। जिसमें मुख्य अतिथि प्रो. एन डी आर चंद्रा ने अपने उद्बोधन में कार्यक्रम में सेमिनार में अध्यक्षता कर रहे हैं डॉ प्रेमचंद जायसी जी जिसे मेरा करीब लगभग 10 वर्षों से ज्यादा का परिचय है मुझे मालूम है कि आप राजनीति के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं मा. छाया वर्मा जी के यहां आपसे मेरी दोबारा मुलाकात हुई आपका के प्रबंधन देखकर मैं अपने आप को महसूस कर रहा हूं इस कार्यक्रम के प्रबंध समिति के सचिव पाटले जी इस कार्यक्रम में उपस्थित डॉ कमलेश जो जा चुके हैं लेकिन जोश भरी बात उन्होंने कही है एन इपी 2020 के बारे में डॉ किरण ठाकुर जो की गर्ल्स कॉलेज में केमिस्ट्री की प्रवक्ता ही रसायन शास्त्र की और महाविद्यालय के प्राचार्य जायसी इस भाव मनी भाव मानी और भव्य कार्यक्रम में उपस्थित महोदय गणमान्य नागरिक पत्रकारगढ़ शिक्षाप्रद विद्यार्थियों इस ग्रामीण एरिया में शिक्षा का पचपेड़ी में संत गुरु घासीदास महाविद्यालय के इस प्रांगण में जल रहे हैं इसके लिए मैं आप लोगों को बधाई देता हूं और विशेष कर में आप लोगों की भूरपूर प्रशंसा करता हूं कि आपने इस कार्यक्रम को आयोजित किया है आपका वह बात जो आप लोगों ने संत गुरु घासीदास जी का एक चित्र हमें प्रेजेंट किया है जिसमें लिखा है वह लाइव मां के मन की एक समान तो इसे मैं समझता हूं कि यह गुरु घासीदास बाबा एक क्षमता मूलक समाज की परिकल्पना करें और छत्तीसगढ़ की धारा से लेकर पूरे भारत में इसका प्रचार और प्रसार कर रहे थे आप लोगों ने दो वक्ताओं का बड़ी व्याख्यान सुनी है एक तो कमलेश जी का जो हम लोग एक ही केजी आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में पड़े 1 साल जूनियर थे मेरे से और अक्सर हम लोग मुलाकात करते हैं और प्रोफेसर भूपेंद्र पटेल और हम हर जगह कार्यक्रमों में जाते हैं लोगों को सुनते हैं अपने विचार रखते हैं तो मैं इसका महाविद्यालय में आप लोगों के बीच पाकर अपने आप को गौरवान्वित कर महसूस करता हूं और आप लोगों को पुनः बधाई देता हूं और बहुत ही की भाई टेक्नोलॉजी कैसे इनेबलिंग फोर्स है यह जब हाथ में होता है तो मुझे लगता है कि मेरे पास कुछ है और यह जब नहीं रहता है तो ऐसा लगता है कुछ खो गया है और कुछ लोगों को तो ऐसा लगता है कि जीवन ही खो गया है टेक्नोलॉजी टेक्नोलॉजी को आपको एक्सेस करना है उसमें मास्टरी हासिल करना है आज की यंग बच्चे इस पर काफी आगे बढ़ रहे हैं और जो जिनका उम्र हो गया है उनको भी कोशिश करना है इस नई शिक्षा नीति के उसे विषय कोलेकर है थोड़ी लंबी होगी आपको थोड़ा सा मुझे सुना होगा कि जब हम एजुकेशन की बात करते हैं शिक्षा की बात करते हैं तो शिक्षा क्या है सामान्य यह मेंयह एक प्रकार का ट्रांसपोर्टेशन ट्रांसपोर्टेशन है परिवर्तन है खुद का परिवर्तन समाज का परिवर्तन देश का परिवर्तन और विश्व का परिवर्तन अधिकार से प्रकाश की ओर लिब्रेटिंग फोर्स है विद्यास मुक्त ही अर्थात किसी धर्म में जाति संप्रदाय से ऊंचा उठाती है वह इंडेक्स है एजुकेटेड मां का यदि आप पढ़े लिखे हैं तो आप किसी धर्म जाति संप्रदाय की बंधन से ऊपर रखेंगे और इंपार्शियल बनेंगे लोगों पर जस्टिस करना सीखेंगे और समानता क्षमता की बात कर रही थी इक्विटी एंड इक्वलिटी टू थिंग्स अरे डिफरेंट शे हस डिफाइंड वेरी नाइसली व्हाट इस डिफरेंस बिटवीन इक्विटी एंड इक्वलिटी शिक्षा की बात करें तो एक बार हम बताना चाहेंगे कि भारतीय शिक्षा की परंपरा में जो शिक्षक रहेगा वही उसका विद्यार्थी करेगा और ऐसी परंपरा चलती रहेगी उसमें डीसेंट करने का डीसेंट मतलब विरोध करने का भाव को कम माना गया है इसीलिए गुरु गोविंद डाउ खड़े काके लागू पे बलिहारी गुरु आपने गोविंद देव बताए अर्थात आपको अपने को यू हैव टू ओवर योर टीचर्स योर ग्रुप बट व्हेन यू कम टू द वेस्टर्न ट्रेडिशनल में आएंगे अरस्तु का चेला कौन था डिसप्ले कौन था आपको पता है इतना बड़ा वैज्ञानिक इतना बड़ा साहित्यकार इतना बड़ा कृति इतना बड़ा सब कुछ इतना बड़ा मन शायद पॉलिटिकल साइंस की आप किताब खोली चाहे आप एसथेटिक की एस्टएचईटीसी सौंदर्य शास्त्र की किताब खोली आप कोई विज्ञान की बात कीजिए कोई संसार की बात कीजिए सब कुछ आपको एरिस्टोटल की ईद की घूमते हुए नजर आएगा आपका लैंग्वेज की बात करते हैं तो फ्रीडम मूवमेंट में हमारी हिंदी एक यूनीफाइंग फोर्स सब लोगों को बांग्ला वंदे मातरम आनंद मठ और विभिन्न प्रकार की भाषाओं में हमें एक किया और इनका योगदान है और एजुकेशन से ही आया है एकता सत्य निष्ठा और राष्ट्र धर्म की बात हमने सीखा गांधीजी और नेहरू जी या सुभाष चंद्र बोस या डॉक्टर अंबेडकर साहब जो बहुत पढ़े लिखे थे इन सब लोगों ने अपनी ट्रेनिंग और एजुकेशन के माध्यम से ही हमें सेलिब्रेट करने का स्वतंत्र करने का अधिकार उठाया आपको मालूम है कि बी आर अंबेडकर कहते हैं शिक्षित बनो संघर्ष करो और संगठित चित्र कितना बड़ा लाइन है एजुकेटेड एंड ऑर्गेनाइज्ड कितना बड़ा है और आईटी विल बे रेलीवेंट इन फ्यूचर स सुभाष चंद्र बोस गिव मी ब्लू आई विल गिव यू फ्रीडम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा इस तरीके सेहमें रात्रि को स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई हम 15 अगस्त के रूप में मनाते हैं और एक बहुत बड़ा परिवर्तन भारत में यह हुआ कि हमारा संविधान एक लिखित संविधान 26 नवंबर 1949 को पूर्ण हुआ और इसको 26 जनवरी 1950 को हमने लागू किया जो कंट्री सावरेन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के रूप में स्थापित हुआ लिखित संविधान सबसे लंबी संविधान मानी जाती है और जब हम यह कहते हैं कि हमारा यह मानना है कि हम जब रामायण की बात करते हैं घर-घर में रामचरितमानस का पाठ होता है गीता और महाभारत की सभाओं में लाखों की सभाओं में होती है तो प्रश्न यह होता है कि संविधान हर व्यक्ति के हाथ में हर बच्चे के हाथ में और हर घर में कॉन्स्टिट्यूशन उनके हाथों में हो तो एक नई क्रांति और ऊर्जा आएगी और भारत के प्रति एक नई समझ आएगी ऐसा मेरा मानना है राजा राम मोहन राय करते हैं कि यह अंग्रेजो ने झोपड़ी हमें अंग्रेजी ऐसा बोलते ठीक है लेकिन राजा राममोहन राय वास सोशल रिमार्क रिफॉर्मर वह एक ब्राह्मण लेकिन उन्होंने कहा उन्होंने संस्कृत कर रहा है के बारे में जरूर बहुत क्रांतिकारी विचारउन्होंने उर्दू का अध्ययन किया मुस्लिम शासको ने उनको फंड किया विदेश जाने के लिए और उन्होंने यह कहा कि यदि हमें आधुनिकता की राह पर चलानी होगी तो अंग्रेजी या आधुनिक शिक्षा को अपनाया तो आपको पता है ग्रेट ग्रेट रिफॉर्मर सती प्रथा जैसे चीजों का उन्होंने अंत किया बहुत सारा परिवर्तन आया और अंग्रेजी शिक्षा चलती रही चलती रही 1857 को क्रांति का समय था एक तरफ भारत अपने देश को अपने हाथों में लेने के लिए अंग्रेजों ने कुछ बात कही बहुत बड़ी बात करी 1857 में आपको पता होगा कितने लोगों को पता होगा एक बहुत बड़ी बात की तीन विश्वविद्यालय का की स्थापना की 1857 में कोलकाता में मुंबई में और मद्रास में और यह यूनिवर्सिटी है यह यूनिवर्सिटी व्हाट इस ए यूनिवर्सिटी का समय मैंने बताया है विभिन्न पदों में दिन के रूप में प्रोफेसर के रूप में वाइस चांसलर के रूप में यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी क्यों कहते हैं वही दो यू कॉल ए यूनिवर्सिटी तुम मुझे एक शब्द में यदि आप डिफाइन करने को कहेंगे तो विश्वविद्यालय इस द सेंटर का इतिहास इतिहास को आप टॉय करके कुछ निर्माण करते हैं कुछ परिवर्तन करते हैं चाहे वह आप आर्ट्स की स्टूडेंट हो चाहे सोशल साइंस के हो और अब वैज्ञानिक है केमिस्ट्री फिजिक्स के या मल्टी डिसीप्लिनरी में काम करते हैं तो उसी से आप इनवाइट करते हैं इनोवेशन करते हैं नया कुछ आविष्कार यंत्र तंत्र का जो भी है वह करते हैं और जवाहरलाल नेहरू द ग्रेट मन जिनको मैं मानता हूं मैं अपनी एचडी पर पढ़ने के बाद डिस्कवरी ऑफ इंडिया की किताब को मैंने पढ़ाईकी और संस्कृति के चार अध्याय रामधारी सिंह दिनकर की किताब पंडित जवाहरलाल नेहरू यह कहते हैं यूनिवर्सिटी डिस्चार्ज देयर डिटेल्स एडेक्वेटली देन इट इस वेल विद थे नेशन एंड पीपल यदि विश्वविद्यालय अपने काम को ठीक तरीके से कर रहे हैं तो सब कुछ ठीक होगा देश में और सब कुछ ठीक होगा लोगों के साथ ऐसा लगता है कि हमारे भारत में हमारी यूनिवर्सिटीज ठे अरे नॉट थेरे नॉट डिस्चार्ज देयर ड्यूटीज प्रॉपर्ली कर रहे हैं जो हर शब्द कैंब्रिज ब्राउन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय टॉप मोस्ट विश्वविद्यालय नहीं कर रहे हैं इसलिए शायद हम यूनिवर्सिटी का मतलब इतिहास एडवेंचर ऑफ इतिहास एडवेंचर यूनिवर्सिटी सरकारी तंत्र से अलग है यूनिवर्सिटी का मतलब होता है ऑटोनॉमी डिसेंट्रलाइजेशन का पावर पावर को ट्रांसफर करना डिसेंट्रलाइजेशन एक्सीलेंस एक्सीलेंस क्या है एक्सीलेंस इस नथिंग बट इनेबलिंग पावर आपको इनेबल करता है योग्य बनाता हैवह यूनिवर्सिटी में होना चाहिए और राधा कृष्णा साहब ने भी इस बात को कहा था और हमें यह जानना होगा की नॉलेज और ओपिनियन में क्या अंतर है और एक फ्रांसिस बेकन का नाम आप लोगों ने सुना होगा उन्होंने कहा था कि हमें एजुकेटेड मन है तो हमें चीजों को हुए करना है जीवन में हम जान नहीं सकते कि क्या अच्छाई है और क्या बुराई है जज नहीं कर सकते नहीं है तो हम पढ़े लिखे नहीं है हमारी पटेल साहब ने दो किताब लाई हमने हम लोगों ने मिलकर लाई और हम लोगों ने यह किताब इंडियन एजुकेशन इन द डिजिटल एज डिजिटल एज आज के जो आगे में प्रथम पैराग्राफ है कि उसमें वह कहते हैं कि एजुकेशन क्या है उनसे किसी ने पूछा तो वह कहते हैं कि एजुकेशन इस द ट्रेनिंग का मोहम्मद सेम टाइम नॉलेज सिस्टम एक्सपीरियंस यह सब समिति के डेवलपमेंट के लिए काम करते हैं तो एजुकेशन सेफ सोसाइटी एंड सोसाइटी सेक्स एजुकेशन वह ट्रैवल करके हमारे लोकल नित को हमारी नेशनल लीड को हमारी ग्लोबल नित को फुलफिल करते हुए नई ऊंचाइयों को लेते हुए आई है और इसीलिए इसी परिवर्तन के कारण इसी चेंज के कारण इसी ट्रांसफॉर्मेशन के कारण अनूप 2020 की जरूरत पड़ी है और इसका यह भी कारण है कि यह प्रश्न उठता है हमारे सामने की जो वर्तमान जो शिक्षा व्यवस्था है वह फ्रेगमेंटेड है बिखरा हुआ है और यह भी जरूरी है कि हमारी कॉग्निटिव स्केल है वह शायद कमजोर है और उसको हम बढ़ाना चाहते हैं लर्निंग आउटकम के माध्यम से डिसिप्लिन की कठोरता है जैसे कि एक आदमी लिया है आर्ट तो मेडिकल साइंस का या इंजीनियरिंग का सब्जेक्ट नहीं पढ़ पाता था अभी आज की स्थिति में तो उसको लिबरलाइज किए हैं और खुलापन नहीं है और ऐसा भी है कि शिक्षकों में और संस्था में ऑटोनॉमी नहीं हैतो इन सब चीजों को देखते हुए की फंडिंग हो अच्छी कोलैबोरेशन हो और नेतृत्व प्रबंधन अच्छा हो रेगुलरली रेगुलेटरी सिस्टम है मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया है नर्सिंग काउंसिल आफ इंडिया है तो पॉपुलर लास्ट फिर उसके सबके ऊपर राज्य में आपको परमिशन लेना पड़ता हैएक सब चीज तो इसमें जो महत्वपूर्ण बात है कि अनूप 2020 में बाय 2030 और 35 वे हैव टू हैव 100% गर और उसके बाद मल्टी डिसीप्लिनरी है मल्टीप्ल एंट्री एंड ऑप्शंस है एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट है फ्लैक्सिबल पूरी खुला है और तीन-चार साल का है और गा 2 साल का है और सीधे ग से आपको डॉक्टरेट में डाल सकते हैं तो रिगिड से आपको थोड़ा सा फ्लैक्सिबिलिटी के लिए आप कोई भी विषय ले सकते हैं और इसमें एक का रेगुलेटरी करने का प्रावधान है और यूनिवर्सिटी को दो प्रकार की यूनिवर्सिटी में बांट दिया गया कि ए तो आपका विश्वविद्यालय टीचिंग विश्वविद्यालय हो जिसमें शिक्षा महत्वपूर्ण हो या दूसरा रिसर्च चाहिए यूनिवर्सिटी सब जाएंगे तो तीन-तीन साल कॉलेज दो 200 कॉलेज यूनिवर्सिटी से रिलेटेड है यह सब को खत्म करके नहाने एफिलिएटिंग कॉलेजेस होंगे वह ऑटोंओमो परिवर्तन आया और आ रहा है और हम नॉलेज सोसायटी की ओर आगे बढ़ रहे हैं लाइफ लोंग लर्निंग की और आगे बढ़ रहे हैं अपॉइंटमेंट को प्राथमिकता दे रहा है फ्लैक्सिबिलिटी को प्रधानता दे रहे हैं मल्टीलिंगुअल एजुकेशन होता जा रहा है हमारी एथॉस कल्चरल वैल्यू पर एसोसिएट इकोनामिक पीपल जब फीवर हो गई जब देने वाले तो हम यह आयाम खोलेंगे की कैसे हम जब बनेंगे अपने स्टार्ट सब शुरू करेंगे और फैमिली में बहुत सारी प्रॉब्लम है सोसाइटी में आएंगे तो सोसाइटीज क्रंबलिंग क्रंबलिंग मतलब छत्तीसगढ़ के संदर्भ में देखेंगे तो भाई-भाई एक साथ नहीं रह सकते हैं और यहां अच्छा चल रहा है उनके लिए ताली बजा दीजिए और भाई-भाई तो एक तो एक प्रॉब्लम है चलो भाई मैं अपने भाई से अलग हो गया कोई बात नहीं लेकिन तो सबसे बड़ा प्रॉब्लम आज है द प्रॉब्लम ऑफ बहो स वह जो पहले शहरों में हुआ करता था वह गांव गांव में देहात में आ गया क्या टेक्नोलॉजी रिस्पांसिबल है या हमारा दिमाग या हमारी तेरे इस ए लीग ऑफ़ लव लव इस मिसिंग ए लव लेटर्स बी ट्री टू अनादर वन अनदर ने कहा है कि हम अपनी प्रेम में एक साथ रहेप्रॉब्लम्स है पॉलिटिकल गेम है एग्जीक्यूटिंग लेजिसलेच्योर और ज्यूडिशरी है प्रेस मीडिया है लेकिन इनमें शायद समझ में की कमी है और डेट टुडे में बहुत मुश्किल हो जा रहा है आप इलेक्शन लड़ना चाहते हैं जैसे मैं इलेक्शन लड़ना चाहता हूं तो मुझे क्या चाहिए क्राइम एंड करप्शन इन द सिस्टम और यह चैलेंज है आपके उसे के लिए की कैसे इनको हम खत्म करें इन्वेस्ट करें इनके लिए और कैसे हम एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ोतरी दें और कैसे मैं 2010-11 में अमेरिका में था हमारी बैंकिंग सेक्टर बहुत अच्छा थी हमारे यहां रिसेप्शन गिरावट नहीं थी रुपए की मूल्य में लेकिन आज गिरावट है क्यों यह अध्ययन का विषय है और उसको जानने की जरूरत है कि हम सी आर नॉट डिस्चार्ज और ड्यूटी इस प्रॉपर्ली इसीलिए शायद हम जापान से शायद चीन से शायद साउथ कोरिया से और शायद न्यू से पीछे जो पीछे हैं क्योंकि वहां पर कम उम्र में वह काम करना शुरू कर देते हैं और हमारे यहां डिग्री सुपर डिग्री लेने के बाद भी हम काम नहीं कर सकते कोई किसी शताब्दी जरूरत है और सब कुछ करते हुए हम एक नई क्रांति और नई योजनाएं होंगी हैंडीक्राफ्ट हॉर्टिकल्चर प्रोडक्ट्स फ्लोरीकल्चर जो छोटे-छोटे उद्योग थे उनको लाना होगा वीडियो स्टार्ट करना होगा इवेंट मैनेजर है एनाउंसर का ट्रेनिंग है ऐसे ऐसे कीजिएबहुतकैसे हम इसको लागू करें तो यह रोड मैप की कमी है कोऑर्डिनेशन की कमी है हम आप तो करना चाहते हैं लेकिन कहां सरकार की मदद मिलेगी कहां नहीं मिलेगी और यह देखना होगा और एडमिशन टेस्ट है हर जगह एडमिशन टेस्ट एंड लॉ के लिए जाइए मैनेजमेंट के लिए चाहिए लाइट चाहिए एमबीबीएस के लिए चाहिए सारा चीज केंद्र अपने हाथों में ले रही है लेकिन मेरा यह मानना है कि एजुकेशन बिलासपुर में हम बिलासपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में यदि हमारे बच्चों का एडमिशन नहीं होगा तो फिर भी बिलासपुर में रहने का क्या फायदा है या हमारे छत्तीसगढ़ को क्या फायदा है जिस पर आपको चिंतन करना होगा मनन करना होगा ह्यूमैनिटीज इस विष्णु ने कहा था कि अलग-अलग है लेकिन नप 2020 में साइंस और आर्ट है वह मिल रहे हैं दोनों में क्रॉस फर्टिलाइजेशन होने का है और हम की कोशिश करें कि हम कैसे अपनी इंडिविजुअल आइडेंटिटी को देश के विकास के लिए एक कलेक्टिव आईडेंटिटी में कलेक्टिव आईडेंटिटी या कलेक्टिव सिस्टम रखते हुए हम कैसे 21वीं शताब्दी में ईस्ट और वेस्ट में समन्वयी कर सके कैसे कलर ऑफ साइंस और कलर आफ आर्ट्स में संबंध नहीं कर सके कैसे हम स्ट्रैटेजिक प्लैनिंग बना सके कैसे हम वह कल लोकल्स और लोकल की बात कर सके और इस तरीके से लास्ट लाइन है जो बहुत इंपॉर्टेंट है और लिखने लायक है वह यह है कि एक वाइस प्रेसिडेंट है अमेरिका के उनका नाम थाउन्होंने कहा था कितनी सन फेल वेयर एजुकेशन फेल्स व्हो हैव एस्क्ड गिर जाएगा खत्म हो जाएगा जहां की शिक्षा प्रणाली खत्म हो जाएगी तो हम यह कोशिश करें कि हम अपने बच्चों के मन को इग्नाइट करें इग्नाइट यंग माइंड टू गो अहेड तो को ए माइंड एंड माइंड्स एंड वह अपने स्किल और नॉलेज को प्राप्त करें हमारे एजुकेशन के माध्यम से कि हम असफल ना हो हमारी शिक्षा असफल ना हो और हम सफल हो इस तरीके से सर्वे संतु आने लायक सर्वे संतरा की भावना लिए हुए देश को हम एक सुपर पावर के रूप में स्थापित करने की भारत को एक सुपर पावर के रूप में स्थापित करने की कोशिश करें मानवता के कल्याण के लिए कार्य करें जय हिंद जय भारत जय छत्तीसगढ़ थे मैनेजमेंट टू टेक अ कॉफी।
डॉ प्रेम चंद जायसी ने अध्यक्षता करते हुए अपने उद्बोधन में कहा स्पष्ट है कि ऐसे महान संत जिन्होंने समता मूलक समाज की स्थापना के लिए अपना पूरा जीवन लगाया ऐसे महान संतों को नमन करता हूं देश को संविधान देने वाले बाबा साहब भीमराव अंबेडकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया और कार्यक्रम करने का प्रयास किया हमेशा जब भी कार्यक्रम हो हमारे हौसले आप चाय के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं यही व्यक्ति का व्यक्तित्व होता है कि अपने जीवन काल का कुछ समय एक महत्वपूर्ण आयोजन में थे और इस क्षेत्र के आंचल और हमारे ही सम्माननीय साथी हमारे पूरे जायसी परिवार से हम दोनों के सुपुत्री और उनके पुत्र जो यहां पर मौजूद है महाविद्यालय के समस्त स्टाफ जो यहां पर उपस्थित है अन्य महाविद्यालय में शोध के रूप में आज इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रोफेसर यहां पर मौजूद है आप सबको महाविद्यालय के घर में कार्यक्रम में उपस्थित के लिए आप सबका स्वागत भी करता हूं आप सबको नमन भी करता हूं इस महाविद्यालय के विद्यार्थी जो यहां पर बैठे हुए हैं सबको भी मेरा इसमें और चंद्र जी के सामने में जो एक स्वयं सागर के समान है समुद्र की गहराई उसके अंदर है उनके सामने में मैं कुछ कहूं तो अतिशयोक्ति होगी की नई शिक्षा नीति लगभग 34 साल बाद इस देश में लागू किया गया है बदलाव हो और आज के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था की ओर हमारा प्रवेश हो नई शिक्षा नीति का भी मैं अध्ययन किया काफी अच्छी-अच्छी बातें उसमें लिखी गई है कि हम कैसे आज के युवा पीढ़ी आज के छात्रों को कैसे हम स्कूल में जा सकते हैं नई शिक्षा नीति में उल्लेख किया गया है परंतु आदरणीय चंद्र साहब और जितने विषय विशेषज्ञ है उन सब के बीच में एक मैं जरूर रखना मैं चाहूंगा क्या देश को देश के रूप में मुक्त देना जरूरी है जैसे कि पूरे देश में 5 किलो अनाज मुक्त में दिया जा रहा है या महतारी बंधन योजना के माध्यम से यदि मैं छत्तीसगढ़ करूं तो ₹1000 दिया जा रहा है या फिर देश को मुक्त शिक्षा देने की आवश्यकता है संभव है और समाज में ऐसे लोग हैं जो ना तो सामाजिक रूप से बढ़ने से नहीं आर्थिक रूप से संपन्नता है तो हम पहले केशिक्षा का क्या आज कि महंगाई शिक्षा के युग में यदि हम ग्रामीण परिवेश की बात करें की बात करें हम सरगुजा आंचल की बात करें कि देश की और दूरस्थ कलर की बात करें तो क्या ऐसे लोग आज की महंगाई शिक्षा को ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं तो नई शिक्षा नीति में मैंने जो अध्ययन करके मैं पाया तो इसका मुझे अभाव लगा और नई शिक्षा नीति पर यदि हम संतुष्टि अधिक कर रहे हैं इस बात को हमें ध्यान देने की आवश्यकता है कि इस देश में आप मुक्त में यदि कोई सामग्री बनते हैं तो हो सकता है उसे बंद करनी आपको पड़ जाए आपको 5 किलो अनाज देना बंद कर जाए यदि आप देना चाहते हैं तो उसे रोजगार में कीजिए अपना स्वयं अपने आप को आर्थिक रूप से संपन्नता की ओर ले जा सके पर इस देश में यदि जरूरी है तो मुक्त शिक्षा सबसे पहले जरूरी है और इस देश में मुक्त शिक्षा किया जाना चाहिए शिक्षा की आवश्यकता होती है और स्वास्थ्य की आवश्यकता होती है मुक्त स्वास्थ्य की परिकल्पना करें चाहे जिस किसी भी व्यक्ति हो जो जहां पर भी रहता हो उसे हंड्रेड परसेंट मुफ्त में चिकित्सा की सुविधा के बारे में सरकार को सोचनी चाहिए और आर्थिक स्थिति में हम उसे रोजगार नहीं है इस देश के लोगों को की मुक्त खोली बताकर उसे हम कमजोर कर दे उनके काम करने की ताकत कोचिंग ले जाता है आज अपने प्रथम सेशन में आप सब में बुद्धिजीवी को आपने सुना मैं जितने भी हमारे मंच में विराजमान ज्योति थी सबका मैं आभार व्यक्त करता हूं और जितने भी प्राध्यापक और प्रोफेसर जितने भी साथी हमारे नीचे भी बैठे हुए सबका भी मैं आभार व्यक्त करता हूं और प्रथम स्टेशन का कार्यक्रम यहीं पर विराम देते हुए महाविद्यालय में चलने का मैं आह्वान करता हूं । मुख्य रूप से प्राचार्य डॉ रविन्द्र कुमार जायसी, दीलीप पाटले, राधेश्याम पाटले, शनि कुमार बर्मन,कुर्रे सहित स्टाफ क्षेत्र के गणमान्य कार्यक्रम में उपस्थित थे।